आदिवासी विभाग का कारनामा- बगैर टीडीएस काटे कर दिया फर्म को लाखों का भुगतान
Publish News : 19 Mar 2017



आरटीआई कार्यकर्ता विशाल बघेल द्वारा सूचना के अधिकार में जबलपुर के 20 छात्रावासों को आईएसओं देने के संबंध में जानकारी मांगी गई थी। इस जानकारी में यह सामने आया है

<div><span style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-family: Mangal; font-size: 17px;">आईएसओ देने वाली संस्था प्रोग्रेसिव मैनेजमेंट सर्विस भोपाल के जितेन्द्र खण्डेलवाल, कहना है की टीडीएस काटने का काम आदिवासी विभाग जबलपुर का था विभाग द्वारा ही लापरवाही की गई है।</span><span style="font-family: Mangal; font-size: 17px; background-color: rgb(255, 255, 255);">&nbsp;</span></div>

आरटीआई कार्यकर्ता विशाल बघेल द्वारा सूचना के अधिकार में जबलपुर के 20 छात्रावासों को आईएसओं देने के संबंध में जानकारी मांगी गई थी। इस जानकारी में यह सामने आया है कि शिल्पा जैन प्रभारी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग जबलपुर द्वारा पत्र क्रमांक/1019/आवि/2016 जबलपुर दिनांक 3/08/2016 भोपाल और इंदौर की प्रोग्रेसिव मैनेजमेंट सर्विस इंदौर, कॉरपोर्रेट वल्र्ड एडवाईजर भोपाल, एसके इंटरप्राईजेंस भोपल, लॉजिशियल इन्फोटेक प्राईवेट इंदौर, फ्लोटेक इंटरनेशनल इंदौर और ईक्षा इंटरप्राईजेस भोपाल को कोटेशन हेतु पत्र भेजा गया। 

जिसमें से प्रोगे्रसिव मैनेजमेंट सर्विस भोपाल को जबलपुर के 20 छात्रावासों को ISO 9001:2015 क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम के अंतर्गत आईएसओ सर्टिफिकेट देने के लिए चुना गया इस संस्था द्वारा 28 हजार रुपये के हिसाब से प्रत्येक छात्रावास को आईएसओ सर्टिफिकेट देने के लिये कोटेशन दिया था। जिसका आदिवासी विभाग ने कोटेशन मान्य करते हुए इस संस्था को आईएसओ का काम दे दिया। बाकी के फर्मो की निविदा दर अधिक होने के कारण उनका कोटेशन निरस्त कर दिया गया। प्रोग्रेसिव मैनेजमेंट संस्था द्वारा 20 छात्रावासों को आईएसओ सर्टिफिकेट देने के बाद आदिवासी विभाग द्वारा पांच लाख 60 हजार का भुगतान कर दिया गया। 
आरटीआई कार्यकर्ता विशाल बघेल द्वारा सूचना का अधिकार के तहत जब जानकारी आदिवासी विभाग मांग गई तो आदिवासी विभाग जबलपुर ने अपनी पोल खुलते देख आनन-फानन में प्रोग्रेसिव मैनेजमेंट सर्विस भोपाल को टीडीएस के 56 हजार रुपये का चेक आदिवासी विभाग को भेजने के लिये कहा गया है। जब हमने संस्था के जितेन्द्र खण्डेलवाल से टेण्डर प्रक्रिया के संबंध में बात की तो उनका कहना था कि आदिवासी विभाग द्वारा हमें बाय हैण्ड कोटेशन लेटर दिया गया जिसके तहत हमने आईएसओ सर्टिफिकेट संबंधित छात्रावासों को दिया।